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‘‘जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है जहांपनाह....’’
June 15, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र

‘‘जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है जहांपनाह, जिसे ना आप बदल सकते हैं ना मैं। हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं, जिसकी डोर उपर वाले के हाथ बंधी हैं, कब, कौन, कैसे उठेगा, ये कोई नहीं जानता...। ’’  फिल्म आनंद का यह डायलॉग दिल को गहराइयों तक छू जाता है। इस फिल्म में कैंसर पीड़ित होने के बावजूद अभिनेता राजेश खन्ना ने जिंदा-दिली, उमंग और उत्साह के साथ लोगों को जीना सिखाया है। 

कुल मिलाकर जीवन अनमोल है.., फिल्मों के डॉयलॉग और रोल निभाने वाले अभिनेता जब आत्मघाती कदम उठा लेते हैं तो उनके द्वारा कहे गए संवाद लोगों के दिलों पर घात कर जाते हैं। 34 वर्षीय फिल्म अभिनेता सुशांत का इस तरह से आत्महत्या कर लेना समझ से परे है। सुशांत ने यह कदम क्यों उठाया यह राज तो उनके साथ चला गया (पुलिस की जांच क्या कहती है, वो तो समय बताएगा)। तनाव में जीवन को दांव पर लगा देना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है। हम देखते हैं कि कुछ विद्यार्थी परीक्षा के दौरान तनाव में आ जाते हैं। पेपर बिगड़ा तो दे दी जान, मोबाइल को लेकर परिजनों ने डांट दिया तो फांसी लगा ली.., पति-पत्नी में विवाद हुए तो दोनों में से किसी एक ने जान दे दी..., जैसी कई घटनाएं सामने आती है..।

हालातों से लड़ने के बजाए आदमी जान देना ही सबसे सरल उपाय मानता है। इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात का सामना करने वाले मुट्ठीभर लोग है। कुछ लोग अपना जीवन जीने की शैली को व्यापक रूप दे देते हैं, और अपने जीने का दायरा भी। जीवन को लेकर एक विशेष बात है कि जब तक इंसान जिंदा रहता है, तब तक वह सोचता है कि ‘वह ही सब कुछ है’। वह भूल जाता है कि उसके जैसे न जाने कितने इस धरती पर आए और कितने ही इस धरा में समाकर मिट्टी बन गए। युवाओं को समझना होगा कि जिंदगी बहुत छोटी है और इसे तनाव रहित होकर जीना होगा। मानसिक अवसाद युवा खुद लेते हैं। कोई नशे का शिकार होकर जिंदगी को दांव पर लगाता है, तो कोई गलत संगत में रहकर। कई फिल्मी कलाकार ड्रग्स के आदी होकर तनावग्रस्त हुए और जान तक दे दी। अगर लोग जिंदगी का मकसद समझ ले और जीवन सरल तरीके से व्यतीत करें तो तनाव और अवसाद जैसी स्थिति जीवन में कभी पैदा ही नहीं होगी। इतना तो समझ में आ गया है कि आत्मघाती कदम उठाने वाले युवा अब जिंदगी से बोर होने लगे हैं।  जीवन को सरलता से जीने के बजाए उसे विशाल रूप देते हैं और संघर्ष जीवन में आता है तो खुद को खत्म कर लेते हैं।  आज सुशांत जैसे हजारों लोग है, जो तनाव को झेल नहीं पाते और अपनी ‘जिंदगी की डोर को काट देते हैं’..., पीछे छोड़ जाते हैं रुदन...,। जीवन अनमोल है..., क्योंकि आपसे आपके परिवार को काफी उम्मीदें रहती है। इस धरती पर मेरी और आपकी तरह न जाने कितने लोग आए और यहां रहे, पर आज वे कहां हैं? सब मिट्टी बन गए। एक न एक दिन हम भी मर जाएंगे और इस धरती का हिस्सा बन जाएंगे। जीवन जीते-जीते सामान्य मौत का हम हिस्सा बनते हैं तो कुछ दिनों का दुख हमारे परिवार वालों को होता है, लेकिन आत्मघाती कदम उठाकर दुनिया से विदा होने का गम परिजन जिंदगीभर भूल नहीं पाते...।