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बचपन के दोस्त को बताए बगैर बना दिया कंपनी का डायरेक्टर
January 30, 2020 • JAWABDEHI • इंदौर

इंदौर । फर्जी लोन माफिया संजय द्विवेदी और पत्नी नेहा के मामले में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। ईओडब्ल्यू ने जब संजय की कंपनी के डायरेक्टर को बुलाया तो उसने बताया कि वह बचपन का दोस्त था, उसके यहां कार चालक था। उसे पता ही नहीं कब उसे डायरेक्टर बनाया और उसके नाम पर जमीन खरीद ली गई।

डीएसपी आनंद यादव के मुताबिक, संजय की एक कंपनी के डायरेक्टर राजेश शुक्ला को पूछताछ के लिए बुलाया था। उसने बताया कि वह संजय का बचपन का दोस्त है और गांव में रहता था। संजय ने उसे कॉल कर बुलाया और अपनी कार चलाने के लिए नौकरी पर रख लिया। इसके बाद उसे पता नहीं चला और 2016 में उसे एक कंपनी में डायरेक्टर बना दिया। इसके बाद उसे 15 मार्च 2016 को रजिस्ट्रार कार्यालय में बुलाया और गवाह के रूप में हस्ताक्षर करने के लिए कहा। मैंने वहां हस्ताक्षर कर दिए।

यादव ने बताया कि बाद में जांच में खुलासा हुआ कि उस दिन एक ही जमीन की दो रजिस्ट्री संजय ने करवा दी थी। इस जमीन के दो पेपर तैयार करवाए गए। एक में कीमत 89 लाख और दूसरे में 74 लाख दर्ज करवाई गई। जमीन राजेश के नाम पर खरीदी गई। अब इस मामले में गुरुवार को देपालपुर क्षेत्र के किसानों को बुलाया है।
इससे यह पता लगाया जाएगा कि आखिर इस जमीन के बदले में उन्हें भुगतान हुआ या नहीं। इसके अलावा रजिस्ट्रार कार्यालय से भी जानकारी मांगी है कि एक ही जमीन की एक ही दिन में दो रजिस्ट्री कैसे कर दी गई है। हालांकि रजिस्ट्रार ऑफिस से कहा गया है कि उनके यहां ऑनलाइन रजिस्ट्री सिस्टम है, जिसमें हर रजिस्ट्री के लिए अलग आईडी बनती है। इस मामले में भी जांच की जा रही है।

आठ बोरे भरकर मिले दस्तावेज- गौरतलब है कि पिछले दिनों ईओडब्ल्यू ने लोन माफिया संजय और उसकी पत्नी नेहा द्विवेदी के ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की थी। इसमें करोड़ों के फर्जी लोन का खुलासा किया था। उसके यहां से आठ बोरे भरकर दस्तावेज मिले हैं, जिनका परीक्षण किया जा रहा है।