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भ्रष्टाचार और घोटाले देश के लिए चुनौती
February 17, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

 

जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक

रिश्वतखोर, भ्रष्टाचारी, अपराधी ये सारी दानवी ताकतें देश के लिए नासूर बनती जा रही है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा जहां ये अपनी दखल न रखते हो। अभी हाल ही में बैंकिंग सेक्टर को लेकर बुरी खबर आई, जिसमें सरकारी बैंकों के साथ 1.17 लाख करोड़ का फ्रॉड किया गया। 

क्या किसी की कोई जवाबदेही नहीं है कि वो देश के लिए सोचे या उसकी समृद्धि के बारे में विचार करें.... या सिर्फ चंद कागजी टुकड़ों के लिए अपना जमीर बेचने पर आमादा हो। जनता अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई सरकारी बैंकों में जमा करती है, लेकिन यहां भी उन्हें धोखा ही मिलता नजर आ रहा है। बैंकिंग सेक्टर की ये खबर बड़ी चौकाने वाली है। 
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 की तीन तिमाही (अप्रैल-दिसंबर) में बैंक फ्रॉड के कुल 8926 मामले दर्ज किए गए हैं। बैंक फ्रॉड की यह रकम 1.17 लाख करोड़ रुपए है। यह खुलासा एक आरटीआई के जरिए हुआ है। खुलासे के मुताबिक, बैंक फ्रॉड से सबसे ज्यादा नुकसान स्टेट बैंक आॅफ इंडिया को हुआ है। एसबीआई के साथ 30300 करोड़ के फ्रॉड हुए हैं। फ्रॉड के कुल 4769 मामले दर्ज कराए गए हैं। पंजाब नेशनल बैंक के साथ फ्रॉड के 294 मामले हुए हैं और बैंक को 14928.62 करोड़ का चूना लगाया गया है। बैंक आॅफ बड़ौदा ने 250 मामलों में 11166.19 करोड़, इलाहाबाद बैंक ने 860 मामलों में 6781.57 करोड़, बैंक आॅफ इंडिया ने 161 मामलों में 6626.12 करोड़, यूनियन बैंक ने 292 मामलों में 5604.55 करोड़, इंडियन ओवरसीज बैंक ने 151 मामलों में 5556.64 करोड़, ओरिएंटल बैंक ने 282 मामलों में 4899.27 करोड़, कैनरा बैंक ने 1867 मामलों में 31600.76 करोड़ का फ्रॉड बताया है। रिजर्व बैंक ने फ्रॉड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। उसने यह भी नहीं बताया कि इससे बैंकों और उसके कस्टमर को कितना नुकसान हुआ है।

बैंकों में बैठे कथित कर्ताधर्ता अपने निजी हित की खातिर देश की आर्थिक स्थिति कमजोर करने में लगे हैं। वर्तमान में बैंक कर्मचारियों की तन्ख्वाह काफी बेहतर है, जिसमें उनका और उनके परिवार का भरण-पोषण बेहतर हो रहा है, लेकिन लोन शाखा में बैठे कुछ कथित अफसर बिना जांच-पड़ताल के लाखों की संपत्ति पर करोड़ों का लोन दे देते हैं, और वह ये जानते हैं कि ये पैसा तो डूबना ही, उसके बावजूद मोटा कमिशन लेकर धोखाधड़ी और जालसाजी करना इनकी आदत में शामिल हो गया है। 
इसी तरह सरकारी विभागों चाहे कौनसा भी विभाग हो, जब तक अफसर-कर्मचारी ‘लक्ष्मी दर्शन’ नहीं कर लेते कोई काम करने को तैयार ही नहीं होता। ईमानदार व्यक्ति अपनी फाइलें लेकर दफ्तरों के चक्कर काटता रहे, लेकिन इनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। ईमानदारी से आदमी काम करना चाहता है, लेकिन सरकारी अफसर और कर्मचारी उन्हें ईमानदारी से काम ही नहीं करने देना चाहते। जो लोग रिश्वत देते हैं वो भी गलत काम करने लग जाते हैं। 
मध्यप्रदेश में बड़े जोर-शोर से शुद्ध के लिए युद्ध चलाया गया और इंदौर में मिलावटखोर नकली घी से लेकर मसाले तक मिलावटी बेच रहे हैं और लोगों की जानमाल से खेल रहे हैं।  क्या किसी का जमीर ही नहीं बचा है..., आत्मा तक लोगों ने बेच दी है। सही-गलत का कोई अहसास ही नहीं हो रहा लोगों को। बस भ्रष्टाचार कैसे किया जाए इस तरफ लोगों का ज्यादा ध्यान है। 

जनता किस पर भरोसा करे, उसे समझ में नहीं आ रहा है। लोग सरकारी दफ्तरों में जाते हैं तो उन्हें काम करवाने के बदले सिर्फ झिड़की सुनने को मिलती है, जबकि जो काम करने वाला है, उसे इसी बात का वेतन मिलता है कि वो जनता का काम करें, लेकिन वो काम करना तो चाहता है, लेकिन रिश्वत लेकर।.... और यही कारण है कि ये भ्रष्टाचारी देश के लिए एक चुनौती बने हुए हैं।