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चावल में सेंधमारी क्यों?
September 14, 2020 • JAWABDEHI • इंदौर


चावल के नमकीन बनाने वालों से सांठगांठ!

गली-मोहल्ले में बन रहे चावल के नमकीन बिक रहे अमानक पॉलीथिन में, पूरे प्रदेश में हो रहा सप्लाय

जवाबदेही@ इंदौर


राशन दुकान वाले चावल सहित तमाम सामान में हेराफेरी करते आ रहे हैं। ये कोई पहला मौका नहीं है, जब उचित मूल्य की दुकानों की हेराफेरी पकड़ी गई है। पहले छोटे स्तर पर कालाबाजारी होती थी, लेकिन अब इसका पैमाना बड़ा हो गया है। इंदौर जिले के अनुभाग महू में जो चावल घोटाला पकड़ा है, वो करीब 100 करोड़ से ज्यादा का होने का अनुमान है। आख्रिर गरीबों के मुंह तक पहुंचने वाले चावल में ये भ्रष्टाचारी क्यों सेंध लगा रहे हैं, इसकी जड़ तक जाने की आवश्यकता है। आज बाजार में बासमती की टुकड़ी ही 50 रुपये किलो में मिल रही है। वहीं चूरी 30 से 35 रुपए किलो। ऐसे में गरीब आदमी को राशन की दुकान से मिलने वाला चावल बासमती चूरी और टुकड़ी से बेहतर होता है। अब एकदम से चावल की कालाबाजारी क्यों होने लगी, इस दिशा में सरकार को सख्ती से जांच करना चाहिए, क्योंकि देशभर में छोटी-मोटी फैक्ट्रियों पर चावल से ब्नमकीन बनाए जा रहे हैं, एक से लेकर 5 रुपये में बड़ा पैकेट तक उपलब्ध हो रहा है। स्वाभाविक है कि कोई भी कंपनी बासमती से तो ये नमकीन बनाने से रही। इसलिए चावल की कालाबाजारी की जा रही है। जवाबदेही ने इस बात को प्रमुखता से उठाया था कि इंदौर में गली-गली चार पहिया वाहनों पर लोग घूम रहे हैं और स्पीकर पर चिल्ला-चिल्लाकर लोगों को कह रहे है कि राशन से मिला चावल 10 रुपये किलो में दो, हम ट्रस्ट को दे रहे हैं। 

नमकीन बनाने वालों से भी पूछताछ

इंदौर में बड़े स्तर पर नमकीन क्लस्टर तैयार हो चुका है। प्रशासन का ध्यान नमकीन बनाने वालों की तरफ भी जाना चाहिए। वहीं बड़ी-बड़ी कंपनियां जो चावल से नमकीन बना रही है, उस दिशा में जांच करनी चाहिए। इंदौर के बाहरी हिस्सों से लगी कॉलोनियों और खासकर सींधी कॉलोनी क्षेत्र में में घर-घर में चावल से बने अटपटे, अप्पे और न जाने कौन-कौन से नाम के नमकीन बनाए जा रहे हैं और सादी पन्नियों में पैकिंग कर बेचे जा रहे हैं। बड़ा गणपति चौराहे के पास एक बड़ी दुकान पर भारी मात्रा बिना किसी दिशा-निर्देश के अमानक पॉलिथीन में ये नमकीन बेचे जा रहे हैं। इंदौर सहित पूरे प्रदेश में खाद्य विभाग को इस दिशा में जांच करना जरूरी है, क्योंकि चावल घोटाले में मोहन अग्रवाल जैसे कई लोग धांधली कर रहे हैं। वहीं, इंदौर सहित प्रदेश के तमाम उचित मूल्य की दुकान चलाने वालों पर सख्ती करनी चाहिए। क्योंकि ये लोग काफी समय से कालाबाजारी कर रहे हैं। 

मुख्यमंत्री ने दिए थे कड़ी कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अनाज माफिया के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए गए थे। निदेर्शों के अनुपालन के क्रम में इंदौर जिला प्रशासन द्वारा महू में लगभग 50 करोड़ रुपये के अनाज घोटाले का पर्दाफाश किया गया है। कलेक्टर  मनीष सिंह ने आज महू में बताया कि इस संबंध में एफआइआर दर्ज की गई है और विस्तृत जांच की जा रही है। इस अनाज घोटाले के तार बालाघाट मंडला और नीमच से भी जुड़े पाए गए हैं। प्राथमिक जाँच में व्यापारी मनोहरलाल अग्रवाल और उसके सहयोगियों के नाम आए हैं। इसमें नागरिक आपूर्ति निगम के एक कर्मचारी की संलिप्तता भी पाई गई है

महू में पकड़ी धांधली

ज्ञात हो कि जुलाई से 2 अगस्त के बीच 32 सैंपल चावल के लिए गए थे। इन्हें दिल्ली की सीजीएएल लैब में जांच के लिए भेजा गया था। लैब की रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी सैंपल इंसानों के उपयोग करने योग्य नहीं थे, जो चावल सप्लाई किया गया वहां पोल्ट्री ग्रेड का था। बस तभी से इंदौर जिले में प्रशासन के कान खड़े हो गए और जांच शुरू कर दी गई। 17 अगस्त को जब शिकायत के संबंध में मौके पर जांच की गई तो पता चला मोहनलाल अग्रवाल जो कि नागरिक आपूर्ति निगम का परिवहनकर्ता है के बेटे मोहित अग्रवाल के हर्षिल ट्रेडर्स स्थित गोदाम जो कि मंडी प्रांगण में शासकीय वेअर हाउस से लगा है में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के चावल के 600 से अधिक कट्टे भरे हैं। इन कट्टों के बदले मोहनलाल अग्रवाल ने जो बिल प्रस्तुत किए, वो भी कूटरचित थे।
मोहनलाल अपने सहयोगी व्यापारियों आयुष अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल एवं शासकीय उचित मूल्य की दुकान संचालकों केसाथ मिलकर शासन से प्राप्त राशन की हेरा-फेरी कर रहे थे। मोहनलाल उचित मूल्य की दुकानों को जो राशन भेजता था, उनके पूरे बिलों पर प्राप्ति के हस्ताक्षर कला लेता था एवं राशन की दुकान पर पहुंचाए हुए सामान में से लगभग 8-10 क्विंटल राशन वापल ले लिया जाता था। इसके बदले राशन दुकान संचालकों को विशेष राशि मोहनलाल अग्रवाल के बेटे तरुण द्वारा भुगतान की जाती थी। दुकान संचालक लोगों को कम सामान देकर इसकी पूर्ति करते थे। दुकानों की जांच में शासकीय राशन के बोरे जो कि सामान्यत: वेअर हाउस से सील बंद भेजे जाते हैं, दुकानों पर खुले 
वाए गए।