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देश की शांति रास नहीं आ रही जयचंदों को
December 23, 2019 • JAWABDEHI • संपादकीय

 



जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक

छुटपुट घटनाओं को छोड़ दे तो देश में अमन था। अयोध्या फैसले को लेकर जो आशंकाएं थी, कि देश में दंगा होगा, लेकिन पूरा मामला सामान्य रहा, जो देश के अहितकारियों को खल गया, क्योंकि वो देश की अखंडता और शांति में सेंध लगाने में नाकामयाब रहे। उन्हें मौका नहीं मिल रहा था कि वो कैसे शांत भारत के माहौल में दंगों का जहर घोले और ये मौका उन्हें नागरिकता कानून बिल पास होने के बाद मिल गया..., और उनके शैतानी दिमाग ने षड्यंत्रपूर्वक पासे फेंके और नासमझ लोग उनके इशारों पर देश में आग लगाते जा रहे हैं। 

यहां गंभीर बात ये है कि हिंसा करने वाले उपद्रवियों को पुलिस खदेड़ रही है तोे पुलिसवालों की किरकिरी कुछ कथित मीडियावाले और नेता कर रहे हैं..., क्या हुड़दंगियों को देश जलाने दे..., पुलिस चौकी को आग लगा रहे हैं, पत्थरबाजी कर रहे हैं, गालियां दे रहे हैं..., क्या उपद्रवियों की आवभगत करना चाहिए। 

देश के अहितकारियों ने तमाशा बनाकर रख दिया है संविधान का। कोई किसी के नाम पर लड़ रहा है तो कोई किसी के नाम पर गाली देकर देश के नागरिकों को भड़का रहा है। जातियों में बांटकर रख दिया है पूरे देश को। अखंड कहे जाने वाले भारत के टुकड़े-टुकड़े करने पर आमादा हो गए हैं वर्तमान के जयचंद..., इन्हें देश का शांत माहौल रास नहीं आ रहा है।
छोटे-छोटे बच्चों के हाथ में तख्तियां थमा दी है (नफरत) की..., बच्चों कोे ये ही नहीं पता कि वो क्यों इस भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं..., उनके दिलोदिमाग में सिर्फ एक ही बात भर दी गई है (हिंदू-मुस्लिम)...। 

देश के अहितकारी ये जानते हैं कि हमारे देश में अशांति कौन फैला रहा है..., सिर्फ सत्ता के लिए निर्दोषों का खून बहाना क्या इसे राजनीति कहते हैं...? तुच्छ और घटिया सोच के साथ देश में अराजकता फैलाकर, देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर क्या दिखाना चाहते हो...?  

इतिहास गवाह है कि किस तरह हमारे देश को छला गया है, किस तरह देश का बंटवारा हुआ, कौन...कौन इस साजिश में शामिल रहे और अपने मंसूबों (कुर्सी) के लिए इस  भारत मां कहे जाने वाली धरती के साथ गद्दारी की गई। जब बिल पास हो रहा था, उसके पहले तो किसी को कुछ नहीं समझ पड़ा। जैसे ही बिल पास हुआ तो तमतमा गए। कुर्सी के लिए कब तक निर्दोषों को बरगलाते रहोगे...।

 जनता अमन चाहती है, लेकिन तुम लोग जनता को सुख-चैन से नहीं रहने दोगे.., सत्ता हासिल करने के लिए खून बहाने की जरूरत नहीं..., ऐसा कोई काम करो कि जनता तुम्हें पसंद करें। पाकिस्तान का गुणगान करने वालों को देश कभी माफ नहीं करेगा। तुम्हें शर्म नहीं आती कि जिस माटी में पले-बड़े हुए हो और उसी माटी के साथ गद्दारी करने पर उतर आते हो।
मीडिया में तो कुछ बातें प्रकाशित ही नहीं होती है, लेकिन अगर इन जयचंदों को अपनी औकात देखना हो तो सोश्यल मीडिया पर देखो, लोग तुमसे कितनी नफरत करते हैं, क्योंकि तुम देश में लोगों को शांति से नहीं रहने दे रहे हो। एक उदाहरण तो बताओ कि सरकार ने मुस्लिम धर्म के खिलाफ बोलो हो। महिलाओं को न्याय दिलाना तो इन्सानियत है। किसी महिला या बालिका से दुष्कर्म होता है तो सड़क पर उतर आते हो..., और अगर उसी महिला के हित में तीन तलाक पर पाबंदी वाला कानून लाया गया तो तुम्हें बुरा लगा..., क्या उस मुस्लिम महिला को इज्जत से जीने का हक नहीं है...? उस महिला पर क्या बितती होगी, जिस पर ये विपत्ती आती है...? क्या सोचा है उस महिला के बारे में। आज मुस्लिम महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है कि उसे इस नरक से मुक्ति मिली..., लेकिन जयचंदों को ये भी अच्छा नहीं लगा...। देश का हर नागरिक चाहता है कि सभी मिल-जुलकर रहे,  लेकिन नेता अपनी कारगुजारी से बाज नहीं आते और दंगे की आग में देश को झोंकने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं...।  

नागरिकता कानून देश के लिए एक अच्छा निर्णय है, जिसके परिणाम आने वाली पीढ़ी को देखने को मिलेंगे, इसलिए आपसे अपील है कि देश में अमन-शांति बनाए रखें और किसी अफवाह पर ध्यान न देकर देश हित में सोचे...., क्योंकि ये जयचंद कभी सुधरने वाले नहीं है...।