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ग्‍वालियर सेंट्रल जेल में दुष्कर्म के आरोपित ने फांसी लगाई, मुख्य प्रहरी सहित 3 निलंबित
January 28, 2020 • JAWABDEHI • मध्यप्रदेश

ग्वालियर।  सेंट्रल जेल में गणतंत्र दिवस की शाम (रविवार) को दुष्कर्म व पास्को एक्ट के मामले में न्यायिक हिरासत में निरूद्ध विचाराधीन बंदी नरोत्तम रावत ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शाम को बंदियों को लॉकअप करने के बाद नरोत्तम बैरक नंबर-9 के पास शिवमंदिर के पीपल के पेड़ पर फांसी पर झूलता मिला। युवक ने फांसी मंदिर के कपड़े से लगाई है। मृतक के परिजनों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उसके साथ अनहोनी होने की आशंका जताई है।

शुरूआती जांच में बैरक नंबर-9 की निगरानी के लिए तैनात मुख्य प्रहरी ओमप्रकाश सुमन सहित तीन प्रहरियों को निलंबित कर दिया है। बंदी की मौत का वास्तविक कारण पता लगाने के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिये हैं। ग्राम ईटमा निवासी नरोत्तम (20) पुत्र पप्पू उर्फ राजेंद्र रावत के खिलाफ इसी माह करहिया थाने में किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने का मामला दर्ज हुआ था। किशोरी के बरामद होने के बाद पुलिस ने इस मामले में दुष्कर्म व पास्को एक्ट के साथ धमकाने की धारा का इजाफा किया। पुलिस का दवाब बढ़ने पर नरोतत्म कंपू थाने मे हाजिर हो गया। कंपू पुलिस ने आरोपित को करहिया थाने के सुपुर्द कर दिया। गिरफ्तारी के समय नरोत्तम नाबालिग था। इसलिए उसे कुछ समय बाल जेल में रखा गया। उसके बाद इसी माह बंदी की आयु 18 वर्ष पूर्ण होने पर 23जनवरी की शाम 3 बजे न्यायिक हिरासत में सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया था।

बैरक नंबर-9 में रखा गया था आरोपित - नरोत्तम की जेल में एंट्री होने के बाद से उसे बैरक नंबर-9 में रखा गया था। जेल में पहुंचने के बाद नरोत्तम काफी तनाव में था। अमूमन पहली बार जेल में पहुंचने वाले कुछ समय तक तनाव में रहते है। और धीरे-धीरे जेल के माहौल में रमने लगते हैं। गणतंत्र दिवस के कारण जेल मे रविवार की सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल था।27 बंदियों की सजा माफ होने पर उनकी सुबह ही रिहाई की गई थी। शाम के वक्त बंदियों को लॉकअप किया गया।