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इतिहास गवाह है : कांग्रेस प्रारंभकाल से ही हिन्दू विरोधी रही है
May 8, 2020 • ललित भारद्वाज • इंदौर


भाजपा और नरेंद्र मोदी मुसलमानों के विरोधी हैं इस बात का प्रमाण ढूंढने में तो वक्त लगेगा, लेकिन इतिहास गवाह है कि कांग्रेस प्रारंभकाल से ही हिंदू विरोधी रही है। दूसरी ओर 70 साल में हिंदू नहीं समझा कि एक परिवार इस हिंदुस्तान को मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहता है और इस देश का मुसलमान मात्र 5 साल में ही समझ गया कि नरेंद्र मोदी इसको हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है। इस बात को साबित करने के लिए कि क्या वास्तव में कांग्रेस हिंदू विरोधी है इसके लिए हमें भारतवर्ष के अतीत के इतिहास में झांकना पड़ेगा। सबसे पहले आजाद भारत के दो नकली नामचीन नेताओं पर चर्चा करनी जरूरी है। यह दो नेता थे- मोहनदास गांधी और जवाहरलाल नेहरू। सर्वप्रथम लेखक का कथन है कि जो मनुष्य आत्मा से महान हो, विचारों से भी महान हो उसे ही महात्मा की उपाधि से विभूषित किया जाता है, लेकिन जो मन का काला व जिसकी आत्मा में मैल भरा हो उसे महात्मा कहना महात्मा की तौहीन कहा जाता है। इसलिए गांधी को महात्मा कहना सर्वथा अनुचित है। 

लेखक तो गांधी के जिद्दीपन को उसकी बेवकूफी ही समझता है जिसके कारण सन् 1947 में पाकिस्तान तो मुस्लिम राष्ट्र बन गया लेकिन हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र नहीं बन सका। पाकिस्तान इस्लामिक राष्ट्र बन जाए इसमें गांधी को तनिक भी ऐतराज नहीं था लेकिन हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र बने इस बात में उसको सख्त ऐतराज था। जब इस देश का धर्म के आधार पर बंटवारा हुआ था तो क्यों वह व्यक्ति आमरण अनशन पर बैठा और वह भी सिर्फ इसलिए कि अगर हिंदुस्तान के मुसलमान पाकिस्तान गए तो ऐसे मैं मरना पसंद करूंगा। ऐसे में लेखक पूछना चाहता है कि जब धर्म के आधार पर दो देश बंट गए थे तो गांधी को आमरण अनशन जैसा झूठा नाटक करने की क्या आवश्यकता आ पड़ी थी। उस समय काल की उस व्यक्ति की जिद ने वर्तमान परिपेक्ष्य में भारत के कैसे हालात बना दिए हैं यह बात देश के किसी भी नागरिक से छिपी हुई नहीं है। और हां ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपिता भी घोषित कर दिया गया। यह सब कांग्रेस की घटिया राजनीति नहीं रही तो क्या रहा। लेखक आज भी उस व्यक्ति को राष्ट्रपिता के रूप में स्वीकार नहीं करता। दूसरी ओर हिंदुस्तान की सरजमीं पर एक से बढ़कर एक क्रांतिकारी वीर व महान आत्माएं हुई हैं जिनको उनके मरणोपरांत देश के करंसी नोटों पर व सिक्कों पर सुशोभित किया जा सकता था। लेकिन कांग्रेस को मात्र गांधी जी ही पसंद आए और आजादी के पश्चात भारतीय करंसी नोटों पर गांधी जी को लाकर बिठा दिया। ऐसा कृत्य करके कांग्रेस ने देश की महान आत्माओं का न केवल अपमान किया अपितु उनको तिरस्कृत भी किया।

भारतवर्ष को आजादी दिलाने में हजारों लोगों ने अहम भूमिका निभाई। अकेले गांधी के चरखे से देश को आजादी नहीं मिली। आजादी पाने के लिए देश के अनेकों क्रांतिकारी सपूतों ने अपने सीने पर गोलियां खाई, कठोरतम यातनाएं भी झेली और तो और अनेकों सपूत फांसी के फंदे पर लटका दिए गए। गांधी व नेहरू चाहते तो सरदार भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु की फांसी रुकवा सकते थे लेकिन इन दोनों को इस बात की भनक थी कि अगर इनको फांसी नहीं दी गई तो आने वाली पीढ़ी के लिए ये तीनों आदर्श बन जाएंगे। मोहनदास गांधी द्वारा एक समुदाय विशेष के लोगों के प्रति रुचि देखते हुए जो भी कार्य किए गए, उन कारणों से द्रवित होकर समय, काल व परिस्थितिवश नाथूराम गोडसे ने गांधी को गोली मार दी। यद्यपि उस व्यक्ति को गांधी का हत्यारा कहा जाता है लेकिन इस बात में तनिक भी संदेह नहीं कि आज तक भी नाथूराम गोडसे के कहे कथनों को विगत 7 दशकों से राष्ट्र की जनता के सामने उजागर नहीं किया गया। आखिर नाथूराम गोडसे के कथनों में ऐसी कौन सी सच्चाई है जो राष्ट्र के सामने उजागर नहीं की जा सकती। यह सच्चाई सिर्फ कांग्रेस जानती थी और जानती है। दूसरी ओर आजादी के वक्त नेहरू द्वारा कश्मीर को लेकर संयुक्त राष्ट्र में बात पहुंचाने की क्या जरूरत पड़ी थी। क्या इस समस्या के समाधान के लिए देशभर में प्रकांड विद्वानों की कमी थी। जबकि सच तो यह है कि इस समस्या के समाधान के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल ही काफी थे, लेकिन उस समय नेहरू में सत्ता लोलुपता व प्रधानमंत्री पद पाने की लालसा थी। उसे लेकर आज तक जब-जब देश में कांग्रेस की सत्ता रही कांग्रेस ने हमेशा मुस्लिम हित को ही सर्वोपरि माना और हिंदुओं को दूसरे दर्जे का नागरिक माना। इन्हीं हरकतों की वजह से आज भारतवर्ष किस मुकाम पर खड़ा है यह बात देश से छिपी हुई नहीं है विशेष रूप से हिंदुओं से तो बिल्कुल ही नहीं है। देश के हिंदू कांग्रेस से पूछें कि अगर देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था तो यह हिंदुस्तान सेक्यूलर क्यों है। ऐसा सेक्यूलरवाद किस काम का जो देश को जड़ मूल से खा रहा है। आज देश का यह हाल है कि जिनके दो बच्चे हैं वह टैक्स भर रहे हैं और जिनके 12 बच्चे हैं वह सब्सिडी ले रहा है। उधर वह व्यक्ति नेहरू ही था जो हिंदू विवाह अधिनियम पर अड़ा रहा और बिना देश और संसद की परवाह किए बगैर उसने इस बिल को पास कर दिया। दूसरी ओर राजीव गांधी ने क्यों सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को खारिज करते हुए मुस्लिम विवाह अधिनियम को पलट दिया जबकि पूरी संसद उस वक्त उसके पक्ष में थी। 

सन् 1990 में जम्मू कश्मीर से लाखों काश्मीरी पंडितों व गैर मुस्लिमों को कश्मीर से बेइज्जत करके निकाल दिया गया। उस वक्त कांग्रेस चुप क्यों थी और आज जब लाखों बंगलादेशी घुसपैठियों पर आंच आती दिखाई दी तो कांग्रेस तड़प उठी। आज कांग्रेस द्वारा मुस्लिमप्रस्त नीतियों के पक्षधर होने के कारण ही देश का हिंदू बहुसंख्यक होकर भी सबसे ज्यादा शोषित है। भाजपा ने कश्मीर से धारा 370 और 35-ए हटाई तो कांग्रेस ने इसका पुरजोर विरोध किया, तीन तलाक बिल पारित हुआ तो उसका भी कांग्रेस ने खुलकर विरोध किया, सीएए-एनआरसी-एनपीआर जैसे बिलों का खुला विरोध कांग्रेस द्वारा खुलकर किया गया। ये सभी उपरोक्त बिल व कार्य राष्टÑहित के हैं लेकिन कांग्रेस इन सब का विरोध इसलिए कर रही है कि उसे सिर्फ मुसलमानों के हित की ही बात अच्छी लगती है हिंदू हित की कदापि नहीं। जबकि भाजपा ने ये सब कार्य  किए हैं वे सभी के सभी राष्टÑहित के हैं। अगर कांग्रेस देश हित की बात करती तो सन् 1984 के सिक्ख विरोधी दंगों में मात्र 3 दिन में हजारों सिक्ख मारे न जाते और तो और कांग्रेस की बेशर्मी की इंतिहा देखिए कि सन् 1984 के दंगों का दोषी कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर बैठा दिया। बार-बार देश में गंगा जमुनी तहजीब की बात की जाती है और देश में हो रहे ड्रामे सबके सामने हैं। आठ प्रहर चौंसठ घड़ी कांग्रेस के नेता नरेंद्र मोदी को कोसते रहते हैं जबकि पाकिस्तानी मीडिया ने विगत दिनों कहा था कि मोदी जैसा नेता यदि मुस्लिम समुदाय का होता तो मुस्लिम सिर कटवा लेते लेकिन मोदी को झुकने नहीं देते। वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार हसन निसार ने कहा था कि हमारे पड़ोसी मुल्क हिंदुस्तान की खुशकिस्मती है कि ऐसा नायाब हीरे जैसा नेता नरेंद्र मोदी उनके पास है, पाकिस्तान तो ऐसे नेता के पैदा होने की बात भी नहीं सोच सकता। ऐसे में विगत दिनों कांग्रेस के दो नेता मणिशंकर अय्यर व शत्रुघ्न सिन्हा पाकिस्तान जाकर हिंदुस्तान के बारे में अनर्गल बातें करके हिंदूस्तान को बदनाम करके आ रहे हैं। क्या यही है कांग्रेस की फितरत। हां यह सच है कि कांग्रेस हिंदू विरोधी ही है तभी तो मोदी सरकार द्वारा पारित सभी बिलों का विरोध करके सब हिंदूओं को यह ज्ञान दे रही है कि हां हां कांग्रेस हिंदू विरोधी ही है। वर्तमान में कांग्रेस के नक्शे कदम पर चल कर ममता, मुलायम, अखिलेश, बसपा व अन्य कई क्षेत्रीय घटक दल हिंदू विरोधी हो गए हैं। इन सब का भविष्य कैसा होगा यह बात तो भविष्य के गर्भ में छिपी है लेकिन लेखक इस बात को स्पष्ट तौर से कह रहा है कि मोदी तो मुस्लिम विरोधी नहीं है लेकिन सैकड़ों सबूतों के साथ यह बात डंके की चोट पर कही जा सकती है कि कांग्रेस वास्तव में ही कट्टर हिंदू विरोधी थी और है।
(लेखक के ये निजी विचार हैं)