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कोरोना का रोना कितना सही...
March 14, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

 

जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र

इस समय पूरी दुनिया में सिर्फ एक ही मुद्दा छाया हुआ है और वो है कोराना वायरस। बड़े-बड़े परमाणु शक्ति रखने वाले एवं सृष्टिकर्ता को चुनौती देने वाले देश उस परम शक्ति के पैदा किए एक अदृष्य वायरस से घबरा गए हैं। आज पूरी दुनिया में लगभग 1 लाख 50 हजार लोग विभिन्न कारणों से रोज मरते हैं। जिसमें एक बहुत बड़ा कारण कैंसर भी है और पूरी दुनिया में कैंसर सबसे बड़ी बीमारी है जिसकी दवाएं हैं लेकिन फिर भी ये लाइलाज है तीन महीने में पूरी दुनिया में लगभग 1 करोड़ 25 लाख लोग मर गए जिसमें से कोरोना से करीब 5500 मौतें हुर्इं है जो कि कुछ भी नहीं है लेकिन पूरी दुनिया में इसको लेकर हाहाकार मच गया है सभी देशों ने अपनी सीमाएं बंद कर ली हैं सभी तरह के कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए हैं स्कूल, कॉलेज, मॉल, सिनेमा घर सभी कुछ बंद कर दिया गया है जबकि उन गरीब लोगों का नहीं सोचा जा रहा जो रोज कमाते हैं और परिवार पालते हैं उनका क्या होगा। ऐसा नहीं है कि पहले महामारियां नहीं आर्इं बर्डफ्लू, इबोला, स्वाइन फ्लू, निपाह, एंर्थेक्स, हैजा, प्लेग, सार्स, चमकी ऐसी अन गिनत महामारियां पूरी दुनिया में फैली लेकिन इतनी हायतौबा पहले क्यों नहीं मची क्योंकि उस वक्त न तो इतने टीवी चैनल मौजूद थे और न सोशल मीडिया था। समाचारों के जरिए दुनिया को पता लगता था और गंभीरता से उसे लिया जाता था। इस बार यह कोरोना वायरस स्वाइन फ्लू से मिलता जुलता है ऐसा लगता है कि वही वायरस और शक्तिशाली होकर सामने आया है। ऐसी स्थिति में पूरी दुनिया के देशों को मिलकर साथ में काम करने और बीमारी की रोकथाम करने के बजाय वह लोगों को भूख से मारने में उतारू हो गए है। शानोशौकत पर अनगिनत पैसा लुटाने वाले देश जानबूझकर पूरी दुनिया में भयानक मंदी लाने पर आमादा हो गए हैं। मुझे तो ऐसा लगता है कि यह एक मानव र्निमित बला है जो कि किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उत्पन्न की गई है इसका राज तो बाद में खुलेगा लेकिन अभी हम सबको मिलकर धैर्य से काम लेते हुए इस महामारी से बचना एवं बचाना है। प्रधानमंत्री जी द्वारा पूर्व से ही स्वच्छ भारत अभियान चलाया गया है लेकिन हमने उसे गंभीरता से नहीं लिया सोशल मीडिया पर दिखावे मात्र के लिए हम स्वच्छता का नाटक करते हैं अब सारी दुनिया को मिलकर स्वच्छ दुनिया बनाने का अभियान चलाना पड़ेगा नहीं तो महामारिया नया-नया रूप लेकर आती रहेंगी।