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कोरोना काल में ‘चांदी काटने’ का अवसर!
July 20, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र

देश में कोरोना की आमद के बाद से लोगों की चांदी काटने का व्यवसाय चरम पर है। इधर, कोरोना महामारी शेयर मार्केट की तरह लगातार बढ़त बनाए हुए हैं, ठीक इसी की बराबरी में मेडिकल से जुड़े कारोबारी अपनी दवाइयों के भाव भी बढ़ाते जा रहे हैं। 

जिस प्रकारसे कोरोना से बचने के लिए सुझाव दिए गए, उनमें एक सुझाव यह भी है  कि शरीर में विटामिन-सी की कमी नहीं होनी चाहिए, तो ऐसे में लिमसी टेबलेट को लेने की सलाह दी गई। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे परिवार ने इस गोली को अपनी जीवनचर्या में शामिल कर लिया। मजेदार बात ये है कि लिमसी की 15 गोली का पत्ता जनवरी-20 में 22.50 रुपए में मिलता था। जब तक कोरोना की दस्तक नहीं थी, तब इस गोली की पूछपरख नहीं के बराबर थी। जैसे ही कोरोना महामारी में इस गोली की मांग अधिक होने लगी तो कंपनी ने इस गोली में अन्य दवाई का मिश्रण कर इसके दाम 70/- रुपए प्रति पैकेट कर दिए। 

लोगों के स्वास्थ्य को लेकर हमारे देश में सिर्फ बातें होती है, लेकिन जब बीमार व्यक्ति अस्पताल में दाखिल होता है तो वह अस्पताल के लिए कस्टमर होता है। ग्राहक ही भगवान है, कि बात को ध्यानार्थ कर अस्पताल वाले ग्राहक देवता की जमकर ‘आवभगत’ करते हैं, जिसकी कीमत इस ग्राहक को या तो घर गिरवी रखकर चुकानी पड़ती है या फिर गहने।
एक दौर लॉकडाउन का पूरे देश ने देखा, कि किस तरह लोग एक राज्य से दूसरे राज्य में जा रहे थे। सेवाभावी जनता, समाजसेवी इन पलायनकर्ताओं के प्रति अपनी आस्था दिखा रहे थे। कोई खाना दे रहा था तो कोई ठंडे पानी की बोतलें, तो कोई चप्पल-जूते पहना रहा था। गुरुद्वारों में खाना बांटा जा रहा था। इंदौर की समाजसेवी संस्थाओं के गैस चूल्हे भी 24 घंटे चलते रहे, ताकि कोई इंदौर से भूखा न जाए। निजी संस्थाओं ने लाखों रुपए खर्च किए और दवाइयां तक लोगों को बांटी। मानवीयता समाज ने दिखाई, लेकिन अस्पताल और स्वास्थ्य से जुड़ी संस्थाओं का रवैया नहीं बदला और इस ग्राहक देवता को लूटते जा रहे हैं।