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कोरोना को हराना है, अपनी ‘जेब’ बचाना है
March 30, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र

देश हित में कुछ हीरो तो कोई जीरो

कोरोना के वायरस का देश में डंका बजते ही हाहाकार मच गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने साफ और स्पष्ट कहा कि जो जहां है, वहां ठहर जाए, लेकिन ऐसे दौर में भी नेता अपनी गंदी राजनीति करने से बाज नहीं आए और बेतूकी बयानबाजी करने लगे, जिसका असर ये हुआ कि लोग न चाहते हुए भी अपने-अपने गांव को लौटने लगे, क्योंकि ये लोग शहरों में रोजगार के लिए पहुंचते हैं। अब लोग भारी मात्रा में अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। ऐसी स्थिति में जो नारे और स्लोगन नेताओं और अफसरों द्वारा बोले गए कि कोरोना को हराना है, लेकिन जब प्रधानमंत्री राहत कोष में दान देने की बात है कि नेताओं, अफसरों, फिल्मी कलाकारों और खेल से जुड़ी हस्तियों ने ये तो कहा कि कोरोना को हराना है और हमें मिलकर लड़ना है, लेकिन जब दान देने की बात आई तो सभी ने अपनी जेब बचाकर रख ली। कुछ चुनिंदा हीरो ने ही बड़ी रकम देकर देश हित में अपनी जवाबदेही निभाई। 

आपको बता दे कि वर्तमान में सबी जगह सिर्फ एक ही नाम है और एक ही रोना है और वह है कोरोना। ये तो अब साबित हो चुका है कि ये मानव द्वारा छेड़छाड़ करके फ्यू के वायरस को भयानक बनाया गया और सोश्यल मीडिया को आधार माने तो  सब चीन की तरफ इशारा कर रहे हैं हालांकि पूरी दुनिया में रोजाना विभिन्न कारणों से एवं सामान्यत: लगभग 1लाख 20 हजार आदमी रोज मरते हैं और लाखों बच्चे प्रतिदिन पैदा होते हैं उन मौतों में एक कारण कोरोना भी बना। इस का आर्थिक नुकसान पूरी दुनिया को हुआ और फायदा सिर्फ चीन को हुआ, क्योंकि चीन का शेयर बाजार जिस तरह आसामान छू रहा और वहां जिस तरह से मेडिकल उपकरण का उत्पाद बढ़ा दिया है, जो पूरे विश्व में बेचे जाएंगे। इससे ये सोश्यल मीडिया के अनुसार साबित होता है कि चीन ही इस फसाद की जड़ है।  हालांकि हमारे देश में इसका असर बहुत ज्यादा नहीं होगा क्योंकि हम लोग जड़ी बूटियों एवं प्राकृतिक मसालों जैसे की हल्दी, नमक, लाल मिर्च, तुलसी, पोदीना, काली मिर्च, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक, शहद एवं तमाम गर्म एवं तीखी चीजों को खाते हैं जो कि आयुर्वेद के मुताबिक हमारे शरीर के लिए आवश्यक है, जबकि विदेशों में फीका एवं ठंडा उबला खाना खाया जाता है जो कि शरीर को उतना मजबूत नहीं रख पाता।

चीन वैसे भी ईश्वर को नहीं मानता, लेकिन वो एक शक्ति है जिसने इस दुनिया को और हम सबको बनाया है उसकी ताकत से छेड़छाड़ करके चीन ने उस शक्ति से लड़ाई मोल ले ली है अभी तो चीन का पलड़ा भारी है, लेकिन बहुत जल्दी चीन पर कुदरत की बड़ी मार पड़ेगी तब पासा उलट जाएगा, लेकिन अभी चीन के द्वारा पैदा किए हुए हालात के कारण पूरी दुनिया डरी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने कहा है कि 21 दिन सिर्फ घर में रहो लेकिन वो कहां रहें जिनके पास न तो घर है, न खाना कपड़ा। हमारे देश की आधी आबादी झुग्गी-झोपड़ी एवं फुटपाथ पर रहती है। इन 21 दिनों में सरकार को धुल सकने वाले दस्ताने, मास्क बनवाकर एक सोशल दूरी एवं साफ-सफाई की सीख देकर इस लॉक डाउन को तय तारीख के आगे बढ़ाने की तैयारी नहीं करनी चाहिए नहीं तो गरीब देशों में इस महामारी से कम, लेकिन भूख और परेशानियों से लोग ज्यादा मर जाएंगे और व्यापारी कुछ वर्ष के लिए पिछड़ जाएंगे। लॉक डाउन का आज 8वां दिन है लेकिन पूरे देश में गरीब मजदूर आज भी अपने गांव नहीं पहुंचा है वो रास्ते में फंसे हुए हैं अगर ऐसा ही चलता रहा तो इस बीमारी से ये लोग ग्रस्त हो जाएंगे। जिन ट्रेंनों को मेडिकल के लिए तैयार किया गया है उन्ही में कुछ यात्री  (रूट के हिसाब से ) बोगियां जोड़कर उसमें इन्हें बैठाकर इनके गांव तक छोड़ा जाए और रास्ते में इनकी मेडिकल जांच की जाए। अगर ये भी प्रयास किया गया तो परेशानियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। 

जब देश कोरोना की त्रासदी से गुजर रहा है, ऐसे में हमारे देश के फिल्मी स्टार और स्पो्टर्स के सितारे गहरी नींद में सोए हुए हैं। फिल्मी स्टार में अक्षय कुमार की कोई होड़ नहीं कर सकता। मदद के लिए सदा तत्पर रहने वाले अक्षय कुमार ने 25 करोड़ रुपए का दान कोरोना त्रासदी के समय दिया है। वहीं क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर करीब एक हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक है, लेकिन दान में सिर्फ 50 लाख रुपए दिए, विराट कोहली ने रुपये तो दान दिए, लेकिन कितने दिए यह नहीं बताया। वहीं कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनके पास कुछ नहीं था और आज करोड़ों रुपया है, लेकिन देश को देने के लिए नहीं।

अब बात करते हैं खान बंधुओं की, शाहरुख खान का एक वीडियो सोश्यल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो दुबई में रहने वालों के लिए दुआ कर रहा है। आमीर खान और सलमान खान के पते नहीं, और नसीरुद्दीन शाह और जावेद अख्तर जिन्हें इस देश में डर लगता है, वो अब कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। अमिताभ बच्चन की ओर से कोई दान की खबरें नहीं है। वैसे ये लोग नकली ही जिंदगी जीते हैं। खुदगर्जी भरी हुई है इन फिल्मी सितारों में। आज जो फिल्मी स्टार अरबों रुपयों की संपत्ति के मालिक बन बैठे हैं तो ये गरीबों के रुपयों से खरीदे गए टिकटों की बदौलत ही है, क्योंकि गरीब तबका ही इनका ज्यादा दीवाना होता है। असली जिंदगी जिने के लिए अक्षय कुमार जैसा जिगरा होना चाहिए, जिसने देश में ही कमाया और देश के लिए दे दिया। वहीं खान बंधुओं के लिए कहा जाता है कि कमाते यहां है, खाते यहां का है और दान दूसरे देशों में करते हैं। 
अब नेताओं और अफसरों की बात करते हैं- हमारे देश में देशा और नेता अरबों-खरबों रुपयों की संपत्ति के मालिक है, लेकिन अपील दान-दादाताओं से ही कर रहे हैं, खुद की जेब किसी अफसर ने ढीली नहीं की और न ही किसी नेता ने अपना नाम दान देकर रोशन किया। नेता सिर्फ विधायक निधि और सांसद निधि या मंत्री फंड से दान देने के लिए खुले हाथ रखे हुए हैं, लेकिन खुद की संपत्ति में से कोई दान नहीं दिया। पूरे देश की खबरों पर नजर डाल दो, खाने के लिए नेताओं ने भंडारे खोल दिए है, और खाद्यान्न सामग्री दूसरे के भरोसे से जुगाड Þकर खुद के नाम का डंका बजवा रहे हैं। ऐसा सभी जगह हो रहा है। किसी भी नेता या किसी अफसर का नाम पढ़ने में नहीं आया कि फलां-फलां ने इतने रुपये दान दिए, जबकि मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार का आंकड़ा पूरे देश में अव्वल नंबर पर है। 

इंदौर में नजर आई थी लापरवाही - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने 22 मार्च को सुबह 7 से लेकर रात 9 बजे तक घर से बाहर नहीं निकलने के लिए आग्रह किया और शाम पांच बजते ही घरों की छत पर, गैलरी पर खड़े होकर ताली या थाली या घंटे-घड़ियाल बजाने का आह्वान किया। लेकिन लोग सड़कों पर इस तरह निकले थे, जैसे भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट मैच के बाद भारत की जीत होने पर झंडा लेकर जश्न मनाया जाता है। लोग लापरवाह नजर आए। बगैर मास्क पहने सड़कों पर झुंड में घूमते रहे। वहीं कुछ  मोहल्लों में लोग ताश पत्ती का गेम दहला पकड़ तक खेलते नजर आए। ऐसा सिर्फ इंदौर में ही नहीं हुआ, लगभग मध्यप्रदेश के हर जिले में ये नजारा देखने को मिला। लोग नारेबाजी करते दिखे। दो पहिया वाहनों पर युवा तिरंगा हाथ में लेकर भारत माता की जय का उद्घोष करते जा रहे थे। अब इंदौर नए कलेक्टर मनीष सिंह आने के बाद हालात पर काबू है, लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं।