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मध्यप्रदेश में 80 फीसदी उद्योग हुए शुरू, मजदूरों की कमी
June 27, 2020 • JAWABDEHI • मध्यप्रदेश

भोपाल। कोरोना महामारी के चलते लागू किए गए लाकडाउन अब पूरी तरह से अनलॉक हो चुका है। इसके चलते अब बाजारों में रौनक लौट आई है। यही वजह है कि बाजार में जरूरी सामान की मांग जोर पकडऩे लगी है , जिसकी वजह से अधिकांश उद्योगों को पूर्व की ही तरह माल के आदेश मिलना शुरु हो गए हैं। इसकी वजह से ही अब प्रदेश में लगभग 80 फीसदी से अधिक उद्योग रफ्तार पकड़ चुके हैं। यह बात अलग है कि इन उद्योगों को अभी भी कुशल श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस सकंट से निपटने के लिए अब उद्योग संचालाकों द्वारा अपने -अपने घरों को लौट चुके मजदूरों को लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

रफ्तार पकडऩे वाले उद्योगों में फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, कृषि सहित रोजाना उपयोग में आने वाले वस्तुओं से संबधित उद्योगों को देश-विदेश से नए ऑर्डर मिलने लगे हैं। यह बात अलग है कि टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, मशीनरी, प्लास्टिक प्रोडक्ट, इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे उद्योग अभी भी रफ्तार नहीं पकड़ सके हैं , हालांकि माना जा रहा है कि इस सेक्टर में भी जल्द ही बेहतर स्थिति देखने को मिल सकती है। अगर प्रदेश के शहरों की सिथति पर नजर डालें तो भोपाल में अब 20 फीसदी ही उद्योग ऐसे शेष हैं जिनमें अभी उत्पादन शुरु नहीं हो सका है।

यहां शुरु हुए उद्योगों में 15 से 18 प्रतिशत कुशल कारीगर काम पर आ चुके हैं। इसमें भी खास बात यह है कि जरुरी सामान बनाने वाली यूनिट्स तो 90 फीसदी तक शुरु हो चुके हैं। सीआईआई के जोनल चेयरमैन आशीष वैश्य के मुताबिक ग्वालियर इलाके में कोर इंजीनियरिंग, मैटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्ट्रील आदि में पूरी तरह से उत्पादन शुरु हो चुका है। इसके अनहदा रायसेन जिले के मंडीदीप में उद्योगों को कुशल श्रमिको की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर रोजगार सेतु पर पंजीकृत करीब दो हजार में से 500 श्रमिक ही उद्योगों में काम के हैं। इनमें भी कुशल श्रमिक लगभग 200 है। गांवों की लेबर यहां आने को तैयार नही है। इसी तरह से जबलपुर जिले के औद्योगिक क्षेत्रों और शहरी ग्रामीण इलाके की इंंडस्ट्री में से 80 फीसदी में निर्माण काम शुरु हो चुका है। यहां पर ज्यादातर उद्योग पहले से मौजूद श्रमिकों से ही काम चला रहे हैं।

यहां हाल -बेहाल

  • मंडला जिले में मनेरी में सरिया प्लांट, केमिकल इंडस्ट्री, केबिन चेसिस, इंडस्ट्री, कार्टन इंडस्ट्री आदि है। संचालकों के पास पंूजी का अभाव बना हुआ है। इसके चलते तो कुछ उद्योगों ने बिजली कनेक्शन तक कटवा दिए हैं।
  • बैतूल जिले में लगे उद्योगों में मांग नहीं होने से उद्योग अब भी शुरु नहीं हो सके है।
  • इटारसी में फ्लोर उद्योग संचालक हरजिंदर बिंद्रा के अनुसार खपत में गिरावट से बिक्री 15-20 फीसद ही रह गई है।
  • राजगढ़ जिले के पीलूखेड़ी में आसपास रहने वाले मजदूरों से काम लिया जा रहा है।

यहां कारोबार पकड़ चका रफ्तार
रीवा-सतना जिले में उद्योग पूरी तरह से रफ्तार पकड़ चुके हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट के प्रबंधक जेपी सिंह का कहना है कि स्थानीय स्तर पर शत-प्रशित श्रमिक काम पर आ गए हैं। सतना औद्योगिक क्षेत्र में भी भरपूर उत्पादन शुरु हो चुका है। इसी तरह सागर जिले में भी बाजार में 25-30 प्रतिशत की मांग में वृद्वि दर्ज हुई है। यहां पर मास्क और डिटर्जेंट का कारोबार बढ़ा है हालांकि ,बुंदेलखंड के बाकी क्षेत्र में उद्योगों को रॉ मटेरियल की कमी बनी हुई है। इसी तरह से कटनी जिले के औद्योगिक क्षेत्र लमतरा, पहरूआ, बरगथा व माधवनगर में कटनी शहर और आसपास के गांवों से प्रतिदिन तीन हजार श्रमिक तक काम पर लौट आए हैं।

उद्योगपति यह चाहते हैं राहत

  • बैंकों से त्वरित कर्ज की सुविधा
  • भुगतान बिलों का निपटारा जल्द हो
  • परिवहन की अड़चनें खत्म हो
  • सभी रेलवे स्टेशनों से लोडिंग और अनलोडिंग हो

फिलहाल यह है परेशानी

  • कुछ बैंक योजनाओं को लागू नहीं कर रहे
  • कर्ज भुगतान के लिए बना रहे दबाव
  • टैक्स में रियायत नहीं मिली
  • स्किल्ड लेबर मांग रही ज्यादा मजदूरी