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नाम बड़े दर्शन खोटे...! 
January 15, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक 

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) नाम बड़े दर्शन खोटे वाली कहावत इस यूनिवर्सिटी पर लागू होती है। यह संस्था हमेशा ही विवादों में रहता है। ऐसा क्या कारण है कि जब भी देश में कोई बड़ी घटना होती है तो केंद्र बिंदु यही विश्वविद्यालय रहता है। क्योंकि यहां पढ़ाई के नाम पर कुछ ऐसे लोग तैयार किए जा रहे हैं, जो देश में अराजकता फैलाते हैं। विश्वविद्यालय में पुलिस की इंट्री नहीं होने दी जाती, क्योंकि कैंपस में कई तरह की आपराधिक गतिविधियां होती रहती है। ऐसा महसूस हो रहा है कि पिछले काफी समय में जेनएनयू से ऐसा कोई विद्यार्थी नहीं निकला, जिसने देश का नाम गौरवान्वित किया हो। हर बार मारपीट, हुड़दंग और हिंसा और प्रदर्शन जैसे प्रवृत्ति वाले अनैतिक काम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय  से होते हैं। आज के आधुनिक समय में एक भी ऐसा कोई विद्यार्थी इस यूनिवर्सिटी ने नहीं दिया है जो किसी नामी कंपनी के ओहदे पर बैठा हो। देश में इस यूनिवर्सिटी को अब अपराधियों का गढ़ तक कहा जा रहा है। अभी सोश्यल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें गत दिनों हुए प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा कागज में कुछ मिला रही है। वहीं, आग में घी डालने का काम फिल्मी कलाकार करते आ रहे हैं। अभी हाल ही में दीपिका पादुकोण जेएनयू गई थी, जहां हाथ जोड़कर फिल्मी अदा दिखाई।  छात्रों का दर्द बांटने के नाम पर फिल्मी ड्रामा कर छपाक फिल्म का प्रमोशन कर लिया। ये फिल्मी कलाकार सिर्फ अपने फायदे के लिए ऐसी घटनाओं के दौरान सामने आते हैं, लेकिन हकीकत में ये खुद के लिए जीते हैं। वैसे भी इनकी जिंदगी एक नाटक ही है, असली जिंदगी तो ये कभी जी नहीं पाते। घर में भी रहते हुए ये मौत से लेकर किसी के जन्म तक सिर्फ नाटक करते हैं।
खास बात ये है कि अगर दीपिका पादुकोण से नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के बारे में विस्तार से प्रश्न किया जाए तो जवाब भी नहीं दे सकेगी, क्योंकि असल में हकीकत जाने बिना देश में रह रहे मुसलमानों को पार्टियों ने अपने निजी हित के कारण बरगलाया।

आज देश जिस दौर से गुजर रहा है, वो सब जानते हैं। जनता समझ रही है कि देश में आग सिर्फ सत्ता पाने के लिए लगाई जा रही है। छात्रों का रहनुमा कोई नहीं है। वामपंथी विचारधारा के लोग देश में शांति नहीं देखना चाहते है और ऐसा बरसो से होता आया है, क्योंकि देशहित में उनकी सोच कभी रही ही नहीं है। कुर्सी की लालसा उन्हें इस कदर नीचा गिरा रही है कि वो लोगों की जानमाल की भी चिंता नहीं कर रहे हैं। 

एक छोटा-सा उदाहरण इंदौर शहर का है : इंदौर में कई रोहिंग्या परिवार  शहर के बाहर झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं और आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो चुके हैं। इन बातों को नजर अंदाज किया जा रहा है। आने वाले वक्त में ये लोग पारदी गिरोह जैसी बड़ी वारदात भी कर सकते हैं। इसी तरह ऐसे कई शहर है, जहां ये लोग बेखौफ रहने लगे हैं। देश सुरक्षित रहे और यहां की जनता सुरक्षित रहे, इसे लेकर मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून लागू किया है तो फिर हम लोगों को डरने की कोई जरूरत ही नहीं है, क्योंकि जो घुसपैठिया होगा उसे देश निकाला जाएगा।  यहां रहने वालों को तो किसी बात से घबराने की जरूरत नहीं है। जबरन बात को बढ़ाया जा रहा है। पढ़े-लिखे होने के बाद भी लोग नहीं समझ रहे हैं। जो राजनीतिक दल हाशिये पर जा रहे हैं उन्होंने इस कानून के नाम पर अपना आखिरी दाव हिंदू-मुस्लिम को लड़वाकर खेला है। देश में जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है एवं कानून व्यवस्था को खराब किया जा रहा है वह थमना चाहिए।