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निजी अस्पतालों ने सॉरी कहकर हाथ बांध लिए, सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी
April 13, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

 

जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र

इंदौर में कोरोना को लेकर जनता में सख्ती नहीं 


कोरोना से निपटने में असफल दुनिया के सामने अब भूख विकराल रूप लेकर सामने आ रही है। भारत तो किसान प्रधान देश है, जहाँ पूरा देश खेती पर निर्भर है। और कोरोना संकट में ये दिखाई भी दे रहा है।  देश में जिस तरह से गरीबों को ३ माह तक का राशन एकमुश्त दिया गया और प्रति दिन सामाजिक संस्थाएं लोगो को भोजन पहुँचाती रही। कोरोना के संकट के समय ये बात तो साफ हो गयी कि देश में खाद्यान्न की इसलिए परेशानी नहीं, क्योंकि खेती को आज भी हम महत्व देते है।  अब बात करते है चिकित्सा व्यवस्था की, आज भारत में भी कोरोना ने पैर पसार लिए है।  हर तरफ खौफ दिखाई दे रहा है। लोग अस्पताल जाने से भी कतरा रहे है।  निजी अस्पतालों ने सॉरी कहकर हाथ बांध लिए, सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी। अब साफ- साफ दिख रहा है कि भारत में सरकारी अस्पतालों निजी अस्पतालों से बेहतर बनाने की आवश्यकता है।  कोरोना संकट के समय जिन अस्पतालों ने मानव धर्म नहीं निभाया उन्हें सरकारी अस्पताल में तब्दील करना जरुरी हो गया है।  और जिन डॉक्टरों ने पीठ दिखाई है उनकी डिग्री छीनकर  उनके नाम सार्वजानिक किये जाये। कोरोना का संकट इतनी जल्दी जायेगा नहीं, काफी समय लग जायेगा, जिससे निपटने के लिए सख्ती ही काम आएगी, और सख्ती उन क्षेत्रों में हो जहाँ से इस बिमारी को पनपने दिया जा रहा है। 

लॉक डाउन के २१ दिनों में कुछ ऐसे दृश्य भी दिखाई दिए जो शर्मसार करने वाले रहे।  जब सरकर ने गरीबों को ३ माह का राशन एक मुश्त दे दिया, उज्ज्वला योजना के तहत ३ माह तक गैस की टंकी निशुल्क, वही जन-धन खाते में ५०० रुपए प्रति व्यक्ति दे दिए ताकि दूध, सब्जी आदि की दिक्कत न हो, लेकिन ये गरीब इसके बाद भी सुबह से श्याम और रात तक फ्री में अनाज कहाँ - कहाँ मिल रहा है उसकी टोह लेता रहा और सामान जमा करता रहा। दान-दाता भी बगैर जाने गली-गली घूमकर उनके घरों में राशन भरते रहे। हालात ये हो गए है कि घर में सामान तो भरा है लेकिन ये गरीब सड़कों पर घूमकर फिर भी खाना मांग रहा है। ईमानदार लोग कोरोना से डरकर घर से निकल नहीं रहे है ताकि उनका परिवार स्वस्थ रहे।  और फ्री का ढूंढ़ने वाले शहरभर में भीड़ लगाकर खरीदारी कर रहे है और कोरोना के संक्रमण को बढ़ा रहे है। सुबह और श्याम को कई क्षेत्रों में भीड़ गली-कूचे में जमा हो ही रही है, लोग बिना मास्क लगाए आ-जा रहे है, इससे कोरोना का संक्रमण बढ़ेगा और प्रशासन की सारी तैयारियां ध्वस्त हो जाएगी।

मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में  हमारा इंदौर शामिल ही। रविवार को इस महामारी की चपेट में आए 70 वर्षीय बुजुर्ग समेत दो और मरीजों की मौत का खुलासा किया गया। इसके साथ ही, शहर में इस संक्रमण के कारण दम तोड़ने वाले मरीजों की तादाद बढ़कर 36 हो गई है।

शहर में मरीजों की मृत्यु दर 10.74 प्रतिशत 
शहर में पिछले 48 घंटों के दौरान कोरोना वायरस के जो 49 नए मरीज मिले हैं, उनमें निजी अस्पताल का एक डॉक्टर और एक नर्स भी शामिल हैं। इसके बाद शहर में इस महामारी के मरीजों की तादाद बढ़कर 298 पर पहुंच गई है। इनमें से 36 लोग इलाज के दौरान दम तोड़ चुके हैं। यानी फिलहाल शहर में कोविड-19 के मरीजों की मरीजों की मृत्यु दर 10.74 प्रतिशत है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि शहर में कोविड-19 के मरीजों की मृत्यु दर पिछले कई दिन से राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले कहीं ज्यादा बनी हुई है। इंदौर में कोरोना वायरस के मरीज मिलने के बाद से प्रशासन ने 25 मार्च से शहरी सीमा में कर्फ्यू लगा रखा है। इस दौरान भोपाल में कोरोना से निपटने के लिए उन सभी क्षेत्रों को सील कर दिया है, जहाँ संक्रमण है।  लोगो को न तो बाहर आने दिया जा रहा है न ही किसी अन्य को अंदर जाने दिया जा रहा है, इसके विपरीत इंदौर में रोक-टोक दिखाई नहीं दे रही है।


जवाबदेही अपील

घर में रहे, सुरक्षित रहे, एक-दूसरे से दूरी बनाकर रहे, बाजारों में सामान खरीदने के लिए भीड़ न लगाएं, प्रशासन के नियमों का पालन करें