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समाज को कौन बदलेगा...?
July 13, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र

कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर पर पुलिस पर सवाल दागना शायद उचित नहीं है। समाज का हर तबका गुंडों और बदमाशों से पीड़ित है। हम इंदौर की ही बात करें तो शायद ही कोई ऐसा व्यापारी बचा होगा, जो प्रोटक्शन मनी ना देता हो। समय-समय पर पालदा क्षेत्र सहित औद्योगिक क्षेत्र से शिकायतें सुनने को मिलती है कि हमें ‘गुंडा टैक्स' देना पड़ता है। आला अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचती है, कुछ बदमाशों के खिलाफ मामूली कार्रवाई की जाती है, फिर छोड़ दिया जाता है। बदमाश फिर अपनी अवैध कमाई शुरू कर देते हैं। इसी सप्ताह एक्सिस बैंक में दिनदहाड़े लूट की वारदात हुई। लूटेरे पकड़ा गए, लेकिन उनकी जो तस्वीरें पुलिस के साथ प्रकाशित हो रही है। इस वजह से पुलिस पर सवाल उठना तो जायज है। यहां पर पुलिस की बात करें तो यह भी एक सामाजिक संस्था ही है, जो जनता की सुरक्षा को लेकर काम करती है, लेकिन जब इन पुलिसवालों की नजदीकी गुंडों से निकलती है तो जनता का भरोसा पुलिस पर कैसे हो सकता है? सीमा पर देश के दुश्मनों से सेना रोज लड़ती है। रोज आतंकवादी, घुसपैठिये मारे जाते हैं, उसमें हमारी सेना के जवान भी शहीद होते हैं। इसी प्रकार गुंडें भी देश और समाज के दुश्मन हैं। इन्हें भी मारना ही चाहिए। लेकिन राजनीति जो न हो सके, वह भी करा देती है।

अब बात इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की करते हैं, जो सारी हदें पार करता जा रहा है। पूरा विश्व कोरोना के कहर से कराह रहा है, लेकिन टीवी वाले अमिताभ बच्चन को लेकर इतने उतावले दिखे, जैसा कि पूरी दुनिया में सिर्फ बच्चन परिवार है, और दूसरा कोई नहीं। कोरोना संक्रमण से अमिताभ बच्चन और उनका परिवार जैसे ही चपेट में आया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वालों की कान खड़े हो गए। पूरा दिन अमिताभ बच्चन से जुड़े कहानी-किस्से और फिल्मी सफर की दास्ता बताई गई, महायोद्धा तक कह दिया। ऐसा लग रहा था मानो अमिताभ बच्चन (......)। अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा की उम्र में आज भी लोग काम कर रहे हैं। अमिताभ बच्चन काम कर रहे हैं तो कोई कमाल नहीं कर रहे।  टीवी वालों ने पत्रकारिता के नाम पर कुछ भी दिखाना शुरू कर दिया है। पूरा दिन लोगों का सिर दुखा गए टीवी वाले। चलो एक चैनल हो तो कोई बात नहीं, जैसे ही रिमोट से चैनल बदलो, अमिताभ बच्चन से जुड़ी खबरें..., मजाक बनाकर रख दिया टीवी वालों ने। बेचारी जनता जो कोरोना से इतना दुखी है कि उनके आने-वाले तीन-चार साल खराब हो चुके हैं। अब दूसरी राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस में सरकार गिराने और बचाने की जोर आजमाइश शुरू है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वालों के हाल देखते ही तरस आता है कि, क्यो वह सोश्यल डिस्टेंसिंग को पालन करना भूल गए। एक नेता बेचारा कार में बैठता है, कार के कांच में से नेता के मुंह तक 10-20 माइक रख देते हैं। बेचारा नेता पसीने-पसीने होता रहा, लेकिन मीडिया वाले नेता के मुंह के पास माइक को इंच दर इंच बढ़ाते जा रहे थे। एक समय तो ऐसा आया कि नेता अपना मुंह इधर-उधर घूमाने लग गए, ताकि उन्हें माइक की चोट न लग जाए। मीडिया चाहे प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक वह समाज का आईना होता है। मीडिया की जवाबदेही होती है कि वह ऐसे समाचारों को दिखाए या प्रकाशित करें, जिससे जनता का सरोकार हो, लेकिन आज हकीकत इसके उलट जाती दिखाई दे रही है।