ALL संपादकीय देश विदेश राजनीति अपराध ई-पेपर मध्यप्रदेश इंदौर
समय चक्र पर भारी पड़ा कोरोना काल
June 8, 2020 • जगजीत सिंह भाटिया • संपादकीय

जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र

पूरा विश्व कोरोना के सामने नतमस्तक हो गया। कोरोना काल समय चक्र पर भारी पड़ा है। इस काल ने ये बता दिया है कि सबसे ज्यादा जरूरी क्या है? रोटी-रोजी के अलावा कोई अन्य वस्तु मायने नहीं रखती। हम इस काल को बड़ी भयावता के साथ देख रहे हैं..., लगा जैसे दुनिया थम-सी गई...। कहीं से कोई अच्छी खबर सुनने को नहीं मिली..., सिर्फ मौत, लाचारी, बेकारी और दुखों के अलावा दुनिया में कहीं कुछ हो ही नहीं रहा। कहीं भूकंप के झटके तो कहीं आग तो कहीं एक्सीडेंट में लोगों का अकाल मरना जैसी बातें रोज सामने आती गई। दुखद बड़Þी त्रासदी की ये घटनाएं, जिनमें कोरोना संक्रमण के इन अंधियारे दिनों में महाराष्ट्र के औरंगाबाद और जालना के बीच 16 मजदूर एक मालगाड़ी से कटकर मरे थे। ये मजदूर पैदल अपने गांव लौट रहे थे। खून से सनी रोटियां गवाह थीं कि इन्हीं रोटियों की आस में वे मारे गए। मुंबई के सायन अस्पताल के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए थे। इनमें प्लास्टिक बैग में सील किए गए शवों के समीप कोरोना के मरीज लेटे नजर आ रहे थे। एक मजदूर महिला यात्री ने रास्ते में ही नवजात शिशु को जन्म दिया और ऐसी ही स्थिति में वह महिला अपने नवजात शिशु को हाथ में लेकर 128 किलोमीटर तक चलती रही। कोरोना संक्रमण से जुड़े ये सारे चित्र ऐसे हैं, जिसे भुलाना नामुमकिन होगा। 

कोरोना वायरस शायद अब जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहा है और आने वाला समय काफी कठिन और चुनौतियों से भरा होगा।  एक तरफ सोशल डिस्टेंसिंग का नारा है तो दूसरी तरफ नियमों की धज्जियां उड़ाते लोग हैं, जो भारत में परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। कोरोना संक्रमण रोकने के उपाय और लॉकडाउन जारी रहने की स्थिति में भी कारोबारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, तब फिर ऐसी कोई रूप-रेखा बननी चाहिए जिससे न तो देश में कोई भ्रम फैले और न ही कारोबारियों के सामने किसी तरह की अड़चनें आए। नि:संदेह देश की अर्थव्यवस्था और कारोबारी गतिविधियों के थमे हुए चक्के को फिर से चलाने में समय लगेगा, लेकिन अगर तैयारी सही हो तो उसे कम वक्त में गतिशील किया जा सकता है। फिलहाल इसकी ही जरूरत है। इस जरूरत की पूर्ति के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ कारोबार जगत को भी अतिरिक्त सक्रियता दिखानी होगी। कारोबारी गतिविधियां जितनी जल्दी रफ्तार पकड़ें, उतना ही बेहतर है। साथ ही इस पर भी ध्यान देना आवश्यक है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। अब परीक्षा की वह घड़ी है, जब कोरोना संक्रमण से बचते हुए अर्थव्यवस्था को बचाने के भी प्रयास करने ही होंगे।

जवाबदेही अपील
घर में रहे, सुरक्षित रहे, एक-दूसरे से दूरी बनाकर रहे, बाजारों में सामान खरीदने के लिए भीड़ न लगाएं, प्रशासन के नियमों का पालन करें