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सेना की तर्ज पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को 'वन रैंक वन पेंशन' का इंतजार, क्या पीएम लालकिले की प्राचीर से करेंगे एलान!
July 15, 2020 • JAWABDEHI • देश

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के करीब 11 लाख अधिकारी और जवान, सेना की तर्ज पर 'वन रैंक-वन पेंशन' मिलने की राह देख रहे हैं। इन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से उसी तरह 'वन रैंक-वन पेंशन' की घोषणा करेंगे, जैसे उन्होंने 2015 में भारतीय सेना के लिए की थी।

कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह कहते हैं कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 2004 से पुरानी पेंशन व्यवस्था खत्म कर दी गई थी।
पीएम मोदी से आग्रह है कि वे इस बार स्वतंत्रता दिवस पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए पुरानी पेंशन बहाली और 'वन रैंक-वन पेंशन' देने की घोषणा करें।
केंद्र सरकार इन जवानों और अधिकारियों के लिए यह कदम उठा लेती है, तो इससे सरहद के चौकीदारों की हौसला अफजाई होगी।

रणबीर सिंह ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस पर अगर यह घोषणा हो जाती है, तो पुलवामा व गलवां घाटी के शहीदों के लिए इससे बड़ी सच्ची श्रद्धांजली कोई नहीं हो सकती। पैरामिलिट्री फोर्स के लाखों जवान बॉर्डर और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में लगे हैं।

कोरोना वायरस जैसी महामारी के दौरान इन बलों के जवानों ने लोगों की भरपूर मदद की है। वे जवान जो इस बीमारी की चपेट में आ गए थे और अब ठीक हो गए हैं, उन्होंने दूसरे मरीजों की मदद करने के लिए कदम आगे बढ़ा दिया है।

अब वे प्लाजमा डोनेट कर रहे हैं। एसोसिएशन के मुताबिक पूर्व अर्धसैनिक बलों के कर्मियों ने अपनी इन्हीं मांगों को लेकर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पुलिस से इजाजत मांगी थी, जो नहीं दी गई। इसकी वजह कोविड-19 का संक्रमण बताया गया है।
 
अर्धसैनिक बलों के प्रति भेदभाव व सौतेले व्यवहार को लेकर लाखों परिवारों में भारी रोष एवं बैचेनी व्याप्त है। पुरानी पेंशन बहाली, वन रैंक-वन पेंशन व ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप 'ए' सर्विस जैसी मांगों के लिए लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है।

इस मुद्दे पर एक जुलाई को ट्विटर एक अभियान भी चलाया गया। प्रधानमंत्री व ग्रहमंत्री को कई बार ज्ञापन भी दिया गया है। बतौर रणबीर सिंह, जब 2004 में जब नई पेंशन व्यवस्था लागू की गई तो इन बलों के किसी भी आईपीएस डीजी ने उसका विरोध नहीं किया।

अगर उस समय केंद्र सरकार के समक्ष इन बलों के महानिदेशक अपनी बात रखते, तो आज इन्हें मांगें पूरी कराने के लिए धरने-प्रदर्शनों का सहारा नहीं लेना पड़ता। इन बलों के अधिकारी व जवान, अपने जीवन के चालीस साल देश सेवा में लगाते हैं।

जब ये रिटायर होते हैं तो इन्हें पेंशन सुविधा तक नहीं मिलती। केंद्र सरकार से गुजारिश है कि अर्धसैनिक बलों की लंबित पड़ी मांगों को अविलंब पूरा किया जाए।