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शराब माफिया को कौन दे रहा संरक्षण, डेढ़ महीने में भी रद्द नहीं हुआ सोम का लायसेंस
December 21, 2019 • JAWABDEHI • अपराध

 

माफिया पर कार्रवाई को लेकर कमलनाथ सरकार पर सवाल

इंदौर। कमलनाथ सरकार ने माफिया पर कार्रवाई को लेकर सख्त रूख दिखाने की कोशिश जरूर की है लेकिन सरकार का यह दावा खोखला साबित हो रहा है। प्रदेश में शराब माफिया के सिरमौर के तौर पर पहचाना जाने वाला सोम समूह हर स्तर पर खुद को सरकार की ही मेहरबानी से बचाए हुए हैं। ऐसे में कमलनाथ सरकार की माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा संदेह के दायरे में है। अदालत से सजायाफ्ता होने के बाद भी सोम डिस्टलरी के साथ राज्य सरकार की नरमी का मुद्दा इस बार विधानसभा में भी उठ रहा है। भिंड से बसपा के सरकार को समर्थन दे रहे के विधायक संजीव सिंह इस मामले को प्रश्नकाल में उठाएंगे। कायदे से अब तक सोम का लायसेंस रद्द हो जाना चाहिए था। 

सरकार ने जो जवाब विधानसभा में दाखिल किया है, उससे ही पता लग जाता है कि सोम को सरकार का संरक्षण हासिल है। सोम पर लायसेंस निरस्त होने की जो कार्रवाई एक दिन में हो सकती थी, पौने दो महीने बीतने के बाद भी सरकार ने उसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया है। आबकारी कमिश्नर के नोटिस का जवाब सोम से मिलने के बाद भी सरकार ने पौने दो महीने में सोम का लायसेंस निरस्त करने को लेकर कोई पहल नहीं की है। सूत्रों के अनुसार धार जिला कलेक्टर द्वारा 2007-08 से लेकर अब तक सोम डिस्टलरी को काली सूची में दर्ज करने के बावजूद सोम को ठेके देने पर भी सवाल उठाया गया है।
धार कलेक्टर के सोम को काली सूची में दर्ज करने के सवाल पर आबकारी विभाग ने विधानसभा को बताया है कि 2004-05 में धार जिले में मदिरा का समुचित प्रदाय नहीं किए जाने के कारण रायसेन की सोम डिस्टलरी को काली सूची में दर्ज किया गया था। आबकारी नीति के तहत यह तय है कि किसी कंपनी का एक भी सदस्य यदि डिफाल्टर है तो उस कंपनी के बोर्ड के सभी सदस्य भी डिफाल्टर ही माने जाएंगे। इस मामले में विभाग ने उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश की गलत व्याख्या कर सोम का लायसेंस भी आज तक निरस्त नहीं किया है। इस मामले में वेबखबर डाट काम के पास मार्च, 2018 के आदेश डब्ल्यू ए नम्बर 248/2018 अमन जायसवाल विरुद्ध मध्यप्रदेश सरकार एवं अन्य की कापी मौजूद हैं। इसके पेज चार के पेरा दो में साफ तौर पर कोर्ट ने कहा है याचिकाकर्ता डिफाल्टर है। उसे शराब लायसेंस देने के योग्य नहीं माना जा सकता। याचिकाकर्ता एक फर्म है और इसके सभी भागीदार डिफाल्टर है। इसलिए लायसेंस देने के योग्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछली सरकार के दौरान आबकारी मंत्री जयंत मलैया का संरक्षण सोम को हासिल था। सोम डिस्टलरी और समूूह पर सरकार का संरक्षण शिवराज सरकार के दौरान भी कायम था और कमलनाथ सरकार आने के बाद भी उसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। पिछली शिवराज सरकार ने अपने लंबे कार्यकाल में किसी भी नई डिस्टलरी को प्रदेश में अनुमति नहीं दी थी।

लेकिन कांग्रेस सरकार बनने के बाद ही सोम ने अपनी उत्पादन क्षमता तीन करोड़ लीटर से अट्ठारह करोड़ लीटर करने के प्रयास शुरू कर दिए थे। इस मामले को मुख्यमंत्री कमलनाथ के हस्तक्षेप से फिलहाल रोक लिया गया है लेकिन आबकारी विभाग के कुछ आला अफसर इस जुगाड़ में थे कि सोम को उत्पादन क्षमता बढ़ाने की अनुमति दे दी जाए। एक गंभीर तथ्य यह भी है कि यह शराब समूह आबकारी विभाग में ही डिफाल्टर होकर काली सूची में दर्ज नहीं है बल्कि औद्योगिक विकास निगम का भी डिफाल्टर है। आबकारी विभाग को तो इससे करीब सौलह करोड़ रुपए की ही वसूली करना है। लेकिन औद्योगिक विकास निगम को सोम से करीब 265 करोड़ की वसूली करना है। इस मामले में तो एक बार अदालत सोम की संपत्ति कुर्क करके वसूली का भी आदेश दे चुकी है। लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार या औद्योगिक विकास निगम सोम का बाल भी बांका नहीं कर पाया है। शराब निमार्ता यह कंपनी, शराब दुकानों के ठेकों में भी प्रदेश में भारी दखल रखती है। शराब दुकानों के ठेकों में भी कालीसूची में दर्ज होने के बावजूद कंपनी को प्रदेश भर में दुकानें हासिल हो रही हैं। इस मामले में भी सरकार में बैठे लोगों और आबकारी अमले ने न सिर्फ अदालतों के आदेशों को दरकिनार किया बल्कि ठेके उठाने में भी भरपूर मदद की।
शराब कंपनी की ताकत का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि भाजपा के सरकार के दौरान भी और अब कांग्रेस सरकार में भी अफसरों की पोस्टिंग तक में उसका भारी दखल है। सूत्रों का कहना है मुरैना के ताजा मामले में कमलनाथ सरकार में ताकतवर माने जाने वाले एक वरिष्ठ राजनेता ने सोम डिस्टलरी को अभयदान दे दिया है। लिहाजा, उसने भी अब अपने लायसेंस को निरस्त होने से बचाने के लिए कोई और कदम नहीं उठाया है। यहां दो तथ्य उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासनकाल में प्रदेश में शराब के कारोबार पर सोम का एकछत्र राज्य था। सूत्रों का यह भी कहना है कि सोम के मामले को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ का रवैया सख्त है बावजूद इसके लायसेंस निरस्त होने की कार्रवाई अब शायद ही रफ्तार पकड़ पाए। उल्लेखनीय है कि मुरैना में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में सजायाफ्ता होने के मामले में आबकारी अधिनियम के तहत सोम डिस्टलरी का लायसेंस निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। आबकारी कमिश्नर ने इसके लिए नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब देने के लिए कहा था। 24 अक्टूबर को जवाब देने की आखिरी तारीख थी। सोम डिस्टलरी ने जवाब तो दिया लेकिन समयावधि बीतने के एक दिन बाद यानि 25 अक्टूबर को। इस बिना पर ही कमिश्नर सोम डिस्टलरी का लायसेंस निरस्त कर सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

सोम डिस्टलरी और उसके मालिक जगदीश अरोरा को 23 साल पुराने शराब तस्करी के एक मामले में मुरैना में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने पिछले महीने 27 सितम्बर को चार अलग-अलग मामलों में न्यायालय उठने तक के कारावास और जुमार्ने की सजा दी थी। अभियोजन के अनुसार, 1996 में मुरैना सेल्स टैक्स बेरियर पर आबकारी विभाग के अफसरों ने तीन ट्रकों में भरी सोम डिस्टलरी की सन्नी माल्ट व्हिसकी की 616 पेटियां बरामद की। यह शराब जारी परमिट की समयसीमा खत्म होने के बाद भी रायसेन से दिल्ली परिवहन की जा रही थी। शराब के परिवहन के लिए जारी परमिट सिर्फ एक साल के लिए ही जारी हुआ था। 23 साल पुराने इस मामले के तीन आरोपी तो फरार हैं लेकिन डिस्टलरी और उसके मालिक को मुरैना कोर्ट में यह सजा दी गई। इस मामले में आबकारी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में डिस्टलरी के मालिक जगदीश अरोरा और ड्रायवर पूरन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद इस मामले में अदालत ने जगदीश अरोरा को न्यायालय उठने तक के कारावास से दंडित किया है। इसके अलावा शराब के अवैध परिवहन के दो मामलों में दो-दो हजार रूपए का जुमार्ना और दो मामलों में पांच-पांच सौ रूपए के जुमार्ने किए गए हैं। अदालत ने शेष आरोपियों के फरार रहने के कारण बरामद शराब और ट्रक के मामले का फिलहाल कोई निराकरण नहीं किया है। आबकारी अधिनियम की धारा 31 सी के तहत सजायाफ्ता होने के कारण सोम डिस्टलरी का लायसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की प्रक्रिया इस समय चल रही है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में जगदीश अरोरा की सजा पूरी हो चुकी है और इस लिहाज से वो आबकारी अधिनियम के तहत सजायाफ्ता की श्रेणी में है।  (वेब खबर से साभार)