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सोम ग्रुप के मालिक व तीन एक्जीक्यूटिव गिरफ्तार
July 13, 2020 • JAWABDEHI • इंदौर

25 करोड़ रुपए के सैनिटाइजर बिना टैक्स दिए बेचने का मामला
जवाबदेही इंदौर। इंदौैर में कार्रवाई के बाद अब भोपाल के शराब कारोबारी सोम ग्रुप के तीन अधिकारियों समेत आॅनर को गिरफ्तार कर लिया है। कार्रवाई डायरेक्टेड जनरल आॅफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) ने की। सोम ग्रुप के ठिकानों पर पिछले एक सप्ताह से रायसेन रोड स्थित फैक्ट्री पर जांच चल रही थी। विभाग ने ग्रुप के तीन सीनियर एक्जीक्यूटिव सहित ग्रुप के आॅनर को देर रात गिरफ्तार कर लिया। बाद में उन्हें जेपी हॉस्पिटल स्वास्थ्य परीक्षण के लिए ले जाया गया। हालांकि विभाग यह खुलासा नहीं कर रहा है कि सोम डिस्टलरीज के आॅनर जगदीश अरोरा को ही गिरफ्तार किया या कोई और है।  सूत्रों के अनुसार ग्रुप ने करीब 20 करोड़ रुपए के हैंड सैनिटाइजर को बिना बिल के बेच दिया। इसका जीएसटी भी नहीं चुकाया। इस पर पांच करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी उजागर होने की संभावना है। चूंकि कोरोना संक्रमण के दौरान सैनिटाइजर की मांग बढ़ गई है। ग्रुप पर यह कार्रवाई  सीजीएसटी एक्ट के सेक्शन-69 के तहत की गई है। बताया जाता है कि चिकित्सीय और थैरापेटिक इस्तेमाल की चीजें 12 फीसदी जीएसटी के तहत आती है।

अरोरा बंधुओं को कोर्ट ने 24 जुलाई तक जेल 
 25 करोड़ रु. के सैनिटाइजर बिना टैक्स दिए बेचने के मामले में गिरफ्तार सोम डिस्टलरीज के डायरेक्टर जगदीश अरोरा, उनके भाई अजय अरोरा और विनय सिंह को गुरुवार को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां से तीनों को 24 जुलाई तक केंद्रीय जेल भेज दिया गया। इस दौरान आरोपियों के वकील अजय गुप्ता ने मजिस्ट्रेट पुष्पक पाठक को बताया कि सोम ग्रुप ने दो करोड़ रु. जीएसटी में जमा कराए थे। आज भी 6 करोड़ रु. जमा कराए गए हैं। जीएसटी विभाग ने अब तक नहीं बताया कि ग्रुप को कितना टैक्स जमा करना है। इस पर मजिस्ट्रेट ने कहा कि मामले की जांच जारी है, इसलिए आरोपियों को फिलहाल जेल भेजा जाता है।

कोर्ट में अस्थमा का अटैक और चक्कर आया
सुनवाई के दौरान अरोरा बंधुओं को कोर्ट में ही अस्थमा का अटैक और चक्कर आया। मजिस्ट्रेट ने दोनों को मेडिकल जांच के लिए जेपी अस्पताल भेजा। मजिस्ट्रेट को मिली मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपियों को कोई गंभीर बीमारी नहीं है। उल्लेखनीय है कि डायरेक्टर जनरल आॅफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) ने जगदीश, अजय और विनय को 28 घंटे पूछताछ के बाद बुधवार को गिरफ्तार किया था। वहीं, सोम डिस्टलरीज के सीईओ सुदर्शन अरोड़ा को भी गिरफ्तार कर लिया है।  विंग के सूत्रों ने खुलासा किया है कि टैक्स चोरी का आंकड़ा 8 करोड़ से बढ़कर 30 करोड़ रुपये पर चला गया है।

जगदीश, अजय और विनय के खिलाफ प्रकरण
जीएसटी टीम गुरुवार को जब आरोपियों को लेकर कोर्ट परिसर पहुंची, तब तक उन्हें नहीं पता था कि किस अदालत में आरोपियों को पेश करना है। बाद में उन्हें मजिस्ट्रेट पुष्पक पाठक की कोर्ट में ले जाने के निर्देश मिले। आरोपियों को परिसर में नीचे बने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम के पास ले जाया गया। इसी दौरान अरोरा बंधुओं की तबीयत खराब हुई, इससे गांधी हॉल में भीड़ एकत्रित हो गई। अस्पताल से लौटने के बाद जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई शुरू हुई तो आधे घंटे तक नेटवर्किंग प्रोब्लम बनी रही। बाद में इसे सुधार कर सुनवाई कराई गई।

इन धाराओं में केस दर्ज 
जगदीश, अजय और विनय के खिलाफ डीजीजीआई जोनल यूनिट भोपाल ने दंड प्रक्रिया संहिता धारा 157, 158, 190 और 132 एवं 69 एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया है।

एक नजर इधर भी
अकेले ‘सोम’ ही नहीं है कालाबाजारी करने वाले
कोरोना महामारी के चलते सरकार के खजाने खाली हो गए है। सैनिटाइजर के नाम पर अवैध शराब की ब्रिकी की जा रही है। जिससे संबंधित एक मामला भोपाल की सोम डिस्टलरी का पकड़ में आया है, लेकिन इंदौर संभाग में  पीथमपुर, खरगोन एवं धार में  स्थित सभी फैक्ट्रियों से भी कई सौ करोड़ का सैनिटाइजर एवं नकली शराब बनाकर बड़ी मात्रा में बेची गई एवं आज भी बेची जा रही है। 

डीजीजीआई की टीम को अपनी जांच का दायरा बढ़ाकर इन फैक्ट्रियों की जांच भी करनी चाहिए। इसके अलावा यहां पर तो बड़ी ब्रांड की खाली बोतलों में नकली शराब भरकर बनाई जा रही है। नकली ब्रांडों को लोग असली समझकर ज्यादा कीमत में खरीद रहे हैं और नकली शराब पी रहे हैं। मध्यप्रदेश नकली शराब बनाने का गढ़ बन चुका है, जिसमें कई बड़े-बड़े नामी शराब व्यापारियों द्वारा गिरोह बनाकर यह अवैध काम सुचारू रूप से संचालित किया जा रहा है, जिससे मध्यप्रदेश सरकार के राजस्व में लगभग 1 हजार करोड़ की चपत महामारी की आड़ में लगाई जा चुकी है। देखा जाए तो पूरे देश के राज्यों को इनके द्वारा लगभग एक लाख करोड़ का नुकसान हर साल पहुंचाया जाता है। स्थानीय नेताओं, अधिकारियों की सांठगांठ से यह अवैध कारोबार सालों से फलफूल रहा है। आबकारी के  राजस्व को बढ़ाने एवं सुरक्षित करने के लिए विभाग का गठन किया गया, लेकिन विभाग के अधिकारी अपनी जेबें भरने में लगे हैं। यहां तक कि पूरे प्रदेश में एमएसपी (मिनिमम सेलिंग प्राइस) एवं एमआरपी (मेक्सिमम रिटेल प्राइस) की भी अनदेखी की जा रही है। उसके बहुत उपर रेट पर शराब बेची जा रही है। अधिकारी अपना हिस्सा लेकर आंख बंद कर लेते हैं। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में आबकारी के राजस्व में हर साल दो से तीन हजार करोड़ के राजस्व की चोरी हो रही है।