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विदेशों में हमारे देश के प्रधानमंत्री के लिए भी होता है खर्च, यहां खर्च होना कोई ताज्जुब नहीं
February 24, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत आए। इसके चलते देश में खासकर गुजरात के एहमदाबाद में तैयारी की गई। उनके आने पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च हुए तो इसमें कोई ताज्जुब नहीं है। रुपया किसी भी मद में खर्च हो, ये तो परंपरा है कि जब भी कोई विदेशी मेहमान आता है तो खर्चा तो करना ही पड़ता है।

जब हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे पं. जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह भी विदेश की यात्रा पर गए तो वहां की सरकारों को रेड कारपेट बिछाना पड़ा और स्वागत सत्कार में करोड़ों रुपए खर्च करना पड़े और किए जाते हैं तो इस बात को बढ़ा-चढ़ाकर बताने वाली बात क्या हो गई। अभी चीन कोरोना वायरस की चपेट में है और चीन के वुहान शहर में हमारे भारतीय लोग फंसे थे, जिन्हें लाने के लिए सरकार ने विमान भेजा और लोगों को निकाला तो इसमें क्या सरकार के करोड़ों रुपए खर्च नहीं हुए। इस बात पर कभी कोई जिक्र नहीं करेगा। बस सत्ता में बैठी पार्टी अगर कोई काम कर रही है तो उसकी टांग कैसे खींचना है, ये काम रह गया है।


आईफा अवॉर्ड का खर्च किस मद में डालेगी मप्र सरकार?
अब बात करते हैं मध्यप्रदेश की। 
‘घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने.. वाली कहावत मध्यप्रदेश सरकार पर लागू होती है।’
 मध्यप्रदेश की सरकार इंदौर में आईफा अवॉर्ड की तैयारी कर रही है। करोड़ों रुपए इस आयोजन में खर्च होंगे, क्या कोई बताएगा कि ये खर्चा किस मद से आएगा, जबकि पहले आईफा अवॉर्ड हो चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश में अपना सिक्का चलता है, इसे दिखाने की चाहत में मध्यप्रदेश की जनता की जेब ढीली होने वाली है। फिल्मी कलाकार यहां आएंगे दो-चार ठुमके लगाकर चले जाएंगे..., जनता का क्या फायदा होने वाला है। बेचारी जनता टैक्स के रडार पर तो है ही। वैसे प्रधानमंत्री किसी नचनिए पर तो रुपया खर्च नहीं कर रहे। ट्रम्प का दौरा व्यापारिक दृष्टि से भी देखा जाना चाहिए। कांग्रेस पूछ रही है कि ट्रंप के दौरे के लिए सरकार के पास पैसा कहां से आ रहा है तो क्या कांग्रेस यह बताने की जहमत करेगी कि मध्यप्रदेश में आईफा अवार्ड पर करोड़ों रुपए खर्च किस मद में हो रहे हैं। एक उंगली उठाने के पहले जो तीन उंगलियां हमारी तरफ उठती है, इस बारे में भी सोचना चाहिए। जनता हित से जुड़ी कई योजनाओं को मध्यप्रदेश सरकार बंद कर रही है, क्योंकि फंड नहीं है। ऐसे में आईफा अवॉर्ड पर रुपए उड़ाना समझ से परे हैं। दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के अफसरों को मुफ्तखोरी की आदत पड़ गई है। इसी के चलते इंदौर में लगातार दूसरे साल होल्कर क्रिकेट स्टेडियम में मैच नहीं होगा। कारण साफ है कि अफसरों को रिश्तेदारों के लिए भी टिकट मुफ्त में चाहिए।