ALL संपादकीय देश विदेश राजनीति अपराध ई-पेपर मध्यप्रदेश इंदौर
ये क्या हुआ...कैसे हुआ.. क्यों हुआ...?
September 21, 2020 • JAWABDEHI • संपादकीय

जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र


जब भी कोई उल-जलूल बातें करता है तो बड़े बुजुर्ग उसे टोकते हैं और हमेशा कहते रहते हैं कि जुबान को काबू में रखना सीखो। क्योंकि जुबान की कीमत बहुत बड़ी होती है। आपने अच्छा बोला तो आपके शब्द कीमती हो गए, कड़वा बोला तो फिर आपको भगवान भी नहीं बचा सकता। चाहे घर में बोलो यो बाहर या सार्वजनिक मंच से बहुत सोच-समझकर बोलो, क्योंकि जुबान को पकड़ने वाले ज्यादा बैठे रहते हैं कान लगाकर, कि वक्ता की जुबान कभी तो फिसलेगी...,

एक छोटा सा उदाहरण हम रामायण का लेते हैं। कुंभकर्ण का.., जब उसने भगवान से इंद्रासन मांगना चाहा तो, उसकी जुबान पर मां सरस्वती का जादू चल गया और कुंभकर्ण निंद्रासन मांग बैठा...। (इसे देवताओं का छल भी बताया गया)।
... खैर राजनीति भी बोलवचन के आसपास ही चलती आ रही है। 

अब हम इंदौर के सांसद की बात करते हैं.., उन्होंने अपने समाज के लिए अलग राज्य की मांग कर ली..., अब कान लगाए बैठे लोगों को ये बात गले थोड़े ही उतरेगी, सोशल मीडिया पर भड़ास उतारने का मौका कोई भी नहीं छोड़ रहा है। खैर, अपनी जुबान संभालते हुए सांसद ने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो जारी कर अपनी कही बात का खंडन भी किया है, लेकिन गुस्सा तो गुस्सा है, इतनी जल्दी शांत थोड़े ही होगा। 

अब कृषि विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पास हो गया। अब इस विधेयक के पास होने का गणित समझिए। जिस तरह नोटबंदी होने के बाद काला धन दबाकर बैठने वाले तबाह हो गए थे। ठीक उसी तरह इस बिल के पास होने से पंजाब और महाराष्ट्र के दो दिग्गजों के पैरों तले की जमीन खिसक गई है। पंजाब के सुखबीर बादल और महाराष्ट्र के शरद पवार की नींद उड़ गई है। सुखबीर के सुखबीर एग्रो को कम से कम पांच हजार करोड़ रुपये की सालाना आय होती थी। वे एफसीआई के और किसानों के बीच के कमिशन एजेंट थे। उनकी कंपनी को 2.5% कमिशन मिलता था। सारे वेयर हाउस उन्हीं के थे। बगैर सुखबीर एग्रो का ठप्पा लगे कोई किसान एक टन गेहूं एफसीआई को बेच नहीं सकता था। एक झटके में सब बर्बाद हो गया। 

महाराष्ट्र में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले 10000 करोड़ की कृषि आय दिखाती थी। पूरे प्याज ,मिर्च और अंगूर के व्यापार पर इसी परिवार का कंट्रोल था।  अब इस विधेयक को पास नहीं होने के पीछे की कहानी तो विरोध करने वाले जानते थे। यही कारण रहा कि राज्यसभा में अभूतपूर्व हंगामा हुआ। माइक तोड़े, किताब फाड़ी, लेकिन कृषि बिल पास हो ही गया...!